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छायावाद की स्तंभ महादेवी वर्मा को याद कर भावुक हुआ साहित्य जगत, जीकेसी ने जयंती पर आयोजित किया कार्यक्रम

पटना, 26 मार्च 2025: हिंदी साहित्य की महान कवयित्री और छायावाद की स्तंभ महादेवी वर्मा की जयंती पर ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (जीकेसी) द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के ग्लोबल अध्यक्ष एवं जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने उन्हें साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि महादेवी वर्मा केवल एक कवयित्री नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और सामाजिक चेतना की प्रतीक भी थीं।

आधुनिक मीरा के रूप में सम्मानित

श्री प्रसाद ने कहा कि महादेवी वर्मा को उनके अनूठे काव्यशिल्प और संवेदनशील अभिव्यक्ति के कारण ‘आधुनिक मीरा’ कहा जाता है। वे छायावादी युग की प्रमुख हस्ती थीं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँ ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’, ‘दीपशिखा’ और ‘यामा’ आज भी साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। ‘यामा’ के लिए उन्हें 1982 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

गद्य साहित्य में भी उल्लेखनीय योगदान

कविता के अलावा, महादेवी वर्मा ने गद्य साहित्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रमुख गद्य रचनाएँ ‘पथ के साथी’, ‘अतीत के चलचित्र’ और ‘स्मृति की रेखाएँ’ हैं, जो हिंदी साहित्य में विशेष स्थान रखती हैं। उनकी भाषा पर असाधारण पकड़ और भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति उन्हें कालजयी रचनाकार बनाती हैं।

सम्मान और योगदान

कार्यक्रम में जीकेसी की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि महादेवी वर्मा प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या भी रहीं और महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। भारत सरकार ने उनके अभूतपूर्व योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था। हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ उन्हें ‘सरस्वती’ कहकर सम्मानित करते थे।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और कविता पाठ

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष दीपक अभिषेक ने की, जबकि सीसीसीआई के ग्लोबल चेयरमैन नवीन कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर समीर परिमल और दिवाकर कुमार ने महादेवी वर्मा की कविताओं का सस्वर पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

इस कार्यक्रम में साहित्य, राजनीति और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें राजेश कुमार डब्लू, संजय कुमार सिन्हा, डॉ. नम्रता आनंद, नीलेश रंजन, धनंजय प्रसाद, दीप श्रेष्ठ, रवींद्र किशोर सिन्हा, अतुल श्रीवास्तव, मुकेश महान, आशुतोष ब्रजेश, दिलीप कुमार सिन्हा, राकेश मणि, अरविंद प्रियदर्शी, राहुल मणि, विनीता कुमारी, बलिराम श्रीवास्तव, रवि शंकर प्रसाद सिन्हा, रवि सहाय, सरोज कुमार सिन्हा, प्रियदर्शी हर्षवर्धन, नित्यानंद प्रसाद, कुंदन कुमार, राजकुमार, प्रेम पंकज कुमार, राजीव, अजीत प्रकाश, श्रेयंकर सिन्हा, अमरेंद्र कंठ, ऋषि राज, डॉ कृष्ण गोपाल सिन्हा, अरविंद अकेला, संदीप स्नेह, आलोक कुमार, मीता सिन्हा, डॉ पूनम शरण, स्नेह लता, डॉ निशा पाराशर, नबीस नवेंदु,अतुल श्रीवास्तव आदि प्रमुख थे।
समीर परिमल एवं दिवाकर कुमार ने कविता पाठ प्रस्तुत किया ।

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